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Founder Chairman’s

The Founder Chairman’s Enduring and Timeless Vision

विद्या ददाति विनयम् विनयात् याति पात्राताम्।
पात्रात्वाद् धनमाप्नोति धुनाद् धर्म ततः सुखम् ।।

“शिक्षा वह बीज है, जो आज बोया जाता है और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सँवारता है।”

अपने विद्यालयों की आधारशिला रखते समय, उनके मन में केवल एक ही सपना था— ऐसी शिक्षा का दीप जलाना, जो केवल पुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि जीवन को दिशा दे, चरित्र का निर्माण करे और समाज को बेहतर बनाए। आज सभी विद्यालयों को निरंतर आगे बढ़ते देखकर यह विश्वास और भी दृढ़ होता है कि सच्ची शिक्षा वही है, जो मन- मस्तिष्क और आत्मा को प्रकाशित करें।

वे स्पष्टरूप से मानते थे कि ज्ञान से रहित शक्ति अंधकार है और संस्कार से विहीन शिक्षा दिशाहीन। इसलिए वे कहते थे - जीवन में सफल होने का अर्थ केवल अच्छे अंक या ऊँचा पद प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि एक अच्छा इंसान बनना है—जो दूसरों के प्रति संवेदनशील हो और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाए। यही सच्ची सफलता है। कठिनाइयाँ आएँगी, पर याद रखना—संघर्ष तुम्हें मजबूत बनाता है और असफलताएँ आगे बढ़ना सिखाती हैं।

उनका अडिग विश्वास था कि अभिभावकों के सहयोग के बिना यह यात्रा संभव नहीं है । विद्यालय और परिवार मिलकर ही बच्चे के भविष्य को सँवारते हैं । जब परिवार के संस्कार और विद्यालय के मूल्य एक साथ चलते हैं, तभी एक संतुलित और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण होता है।

उनके सभी विद्यालय शिक्षा के प्रकाश को फैलाने के दृष्टिकोण को संकल्प के रूप में अपनाए हुए है जैसे - शिक्षा के प्रकाश को हर बच्चे तक पहुँचाना, बच्चों में जीवन मूल्यों को सुदृढ़ करना, और एक सक्षम, विकसित एवं नैतिक भारत के निर्माण में सतत योगदान देना आदि ।

उनका शुभाशीष सदैव विद्यालय के सभी विद्यार्थियों और समस्त परिवारों के साथ बना रहेगा । आप सभी का भविष्य उज्ज्वल हो और विद्यालय निरंतर शिक्षा-संस्कार व सेवा-भाव की ज्योति प्रज्वलित करता रहे। संस्थापक सर की यह दृष्टि प्रत्येक निर्णय में हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी ।

सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

Dr. V.P. Panchal
(Founder Chairman, NVPS)